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सुरेंद्र मोहन पाठक हिंदी के लोकप्रिय अपराध-कथा लेखकों में प्रमुख नाम हैं। उनकी आत्मकथा कई खंडों में प्रकाशित हुई है, जिसमें उनके बचपन, शिक्षा, नौकरी, लेखन की शुरुआत, संघर्ष और एक लेखक के रूप में प्रसिद्धि तक की यात्रा दिखाई देती है। उनकी आत्मकथा...
सुरेंद्र मोहन पाठक हिंदी के लोकप्रिय अपराध-कथा लेखकों में प्रमुख नाम हैं। उनकी आत्मकथा कई खंडों में प्रकाशित हुई है, जिसमें उनके बचपन, शिक्षा, नौकरी, लेखन की शुरुआत, संघर्ष और एक लेखक के रूप में प्रसिद्धि तक की यात्रा दिखाई देती है। उनकी आत्मकथा का पहला खंड “ना कोई बैरी ना कोई बेगाना” है, जिसमें उनके बचपन से कॉलेज के दिनों तक के जीवन का वर्णन मिलता है। इसके बाद “हम नहीं चंगे, बुरा न कोय” में उनके आगे के संघर्ष और लेखकीय जीवन की कहानी आती है। “निंदक नियरे राखिए” में उनके प्रसिद्धि पाने के दौर, प्रकाशकों के साथ संबंधों और पाठकों के साथ उनके जुड़ाव पर चर्चा है। यह वीडियो सुरेंद्र मोहन पाठक की जीवन यात्रा, नौकरी से लेखन तक का सफर, हिंदी क्राइम फिक्शन में उनका योगदान और उनके लेखकीय अनुभवों को समझने का प्रयास है।
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