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कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान – अध्याय 3 प्रतिरोध और दृढ़ता (1000–1700 ई.) Excercise Solution Questions and Answers
Class 9 Social Science chapter 3 pratirodh aur dradta (1000-1700) excercise solutions Questions and Answers in Hindi
पहचान का
मुख्य प्रश्न उत्तर सहित
1. भारतीय शासकों ने अपनी भूमि की रक्षा के लिए प्रतिरोध और गठबंधनों का उपयोग किस प्रकार किया?
उत्तरः भारतीय शासकों ने आक्रमणकारी सेनाओं के विरुद्ध युद्ध करके और अन्य शासकों तथा समुदायों के साथ गठबंधन अपनी भूमि की रक्षा की। उन्होंने अपने क्षेत्रों और राजनीतिक शक्ति की रक्षा के लिए कूटनीति, बातचीत, स्थानीय चार उपयुक्त सैन्य रणनीतियों का भी उपयोग किया।
2. इस अवधि के दौरान विभिन्न राज्यों और समुदायों को कठिन परिस्थितियों में दृढ़ बने रहने में किन बातों ने सहायता को
उत्तरः मजबूत नेतृत्व, सैन्य संगठन, स्थानीय समुदायों का सहयोग, स्थानीय भूभाग का ज्ञान, आर्थिक संसाधन और राजनीतिक ग ने राज्यों तथा समुदायों को दृढ बने रहने में सहायता की। कठिन और बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को दाल उनकी क्षमता ने भी उन्हें जीवित रहने में सहायता की।
3. भक्ति परंपरा ने एकजुटता की भावना पैदा करने में किस प्रकार सहायता की?
उत्तरः भक्ति परंपरा ने भक्ति, स्थानीय भाषाओं, भक्ति गीतों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से लोगों को एक साथ लाग विभिन्न सामाजिक समूहों के लोगों को जोडा और उनमें एकता तथा एकजुटता की भावना पैदा करने में सहायता की।
4. कृषि, व्यापार और वाणिज्य के विकास ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में किस प्रकार सहायता की?
उत्तरः कृषि से खाद्य उत्पादन और राजस्व में वृद्धि हुई, जबकि व्यापार और वाणिज्य ने विभिन्न क्षेत्रों तथा बाजारों को आपस में इन गतिविधियों ने किसानों, व्यापारियों, कारीगरों और अन्य समुदायों को सहायता प्रदान की तथा अर्थव्यवस्था को मजबू रखने में योगदान दिया।
आइए अन्वेषण करें - पृष्ठ 68
प्रश्नः प्रायद्वीपीय भारत में भक्ति परंपरा के प्रसार में नयनार संतों (शिव के भक्तों), जैसे करैक्काल अम्मैयार, और आलवार (विष्णु के भक्तों), जैसे आंडाल, के योगदान का अध्ययन कीजिए। उनकी शिक्षाएँ और भक्ति संबंधी प्रथाएँ उनके भक माध्यम से लोगों से किस प्रकार जुड़ीं?
उत्तरः नयनार और आलवार संतों ने शिव तथा विष्णु को समर्पित भक्ति गीतों के माध्यम से भक्ति परंपरा के प्रसार में सहायता करैक्काल अम्मैयार और आंडाल जैसे संतों ने अपनी भक्ति को ऐसे तरीकों से व्यक्त किया, जिन्हें सामान्य लोग समझ थे और उनसे जुड़ सकते थे। उनके भजनों में स्थानीय भाषाओं का उपयोग किया गया और व्यक्तिगत भक्ति पर जोर गया। इससे भक्ति परंपरा समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों तक पहुँच सकी।
प्रश्न और गतिविधियाँ उत्तर सहित
1. सबसे उपयुक्त उत्तर चुनिए।
प्रतिरोध और दृढ़ता एक-दूसरे से निकटता से जुड़े हुए हैं, क्योंकि:
(1) प्रतिरोध में हमेशा युद्ध शामिल होता है।
(ii) दृढ़ता समुदायों को कठिनाइयों का सामना करने और अपना प्रतिरोध जारी रखने में सहायता करती है।
(iii) प्रतिरोध केवल तभी संभव है जब किसी राज्य के पास बड़ी सेना हो।
(iv) दृढ़ समाज सभी प्रकार के संघर्षों से बचते हैं।
उत्तरः (ii) दृढ़ता समुदायों को कठिनाइयों का सामना करने और अपना प्रतिरोध जारी रखने में सहायता करती है।
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2. राजनीतिक सत्ता में परिवर्तन के समय सिक्खों, मराठों और राजपूतों जैसे समूहों ने अपनी राजनीतिक शक्ति और पहचान क्यों तथा किस प्रकार स्थापित की?
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उत्तरः सिक्खों, मराठों और राजपूतों ने अपनी राजनीतिक शक्ति और पहचान इसलिए स्थापित की, क्योंकि वे बदलते शासन के दौरान अपने क्षेत्रों, स्वतंत्रता, परंपराओं और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना चाहते थे। राजपूतों ने अपनी स्वतंत्रता को खतरा होने पर विस्तार करने वाली शक्तियों का प्रतिरोध किया, लेकिन कुछ शासकों ने अपने राज्यों की रक्षा के लिए राजनीतिक गठबंधन भी बनाए। छत्रपति शिवाजी के नेतृत्व में मराठों ने किलों के जाल, प्रभावी प्रशासन, छापामार युद्ध और स्वराज्य अर्थात स्वयं के शासन के विचार के माध्यम से अपनी शक्ति मजबूत की। मुगलों की शत्रुता का सामना करने पर सिक्खों ने धीरे-धीरे अपनी रक्षा के लिए स्वयं को संगठित किया। 1699 में खालसा की स्थापना और बाद में मिसल नामक सशस्त्र समूहों के गठन ने उनके राजनीतिक तथा सैन्य संगठन को मजबूत बनाया।
इस प्रकार, इन समूहों ने अपनी रक्षा करने और अपना अधिकार बनाए रखने के लिए प्रतिरोध, सैन्य संगठन, स्थानीय संसाधनों, गठबंधनों और मजबूत राजनीतिक पहचान का उपयोग किया।
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3. कुछ राजपूत शासकों ने मुगल सत्ता के साथ गठबंधन करने के लिए बातचीत करना क्यों चुना?
उत्तरः कुछ राजपूत शासकों ने मुगलों के साथ गठबंधन के लिए बातचीत की, क्योंकि अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियाँ अलग थीं। ऐसे गठबंधन उन्हें अपने क्षेत्रों की रक्षा करने, राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने और लगातार युद्धों से बचने में सहायता कर सकते थे। मुगल भी राजपूतों की सैन्य शक्ति और प्रशासनिक क्षमताओं को महत्त्व देते थे। इसलिए सहयोग दोनों पक्षों के लिए लाभदायक हो सकता था और कुछ राजपूत शासकों को अपने क्षेत्रों में पर्याप्त अधिकार बनाए रखने की अनुमति दे सकता था।
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4. कल्पना कीजिए कि आप सूरत, मसूलीपट्टनम या पुड्डुचेरी जैसे किसी भारतीय बंदरगाह नगर में व्यापारी हैं। इटली या फ्रांस का एक विदेशी व्यापारी आपको सूती वस्त्र बेचने के लिए व्यापारिक समझौते का प्रस्ताव देता है। आप स्थानीय बाजार से वस्त्रों की व्यवस्था किस प्रकार करेंगे? आप किन लोगों की सहायता लेंगे और भाषा, वस्तुओं की गुणवत्ता, कीमतों तथा व्यापारिक वस्तुओं के संबंध में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है?
उत्तरः एक व्यापारी के रूप में मैं सबसे पहले स्थानीय बुनकरों, रंगरेजों, वस्त्र उत्पादकों, दलालों और अन्य व्यापारियों से संपर्क करूँगा, ताकि आवश्यक मात्रा और गुणवत्ता के सूती वस्त्रों की व्यवस्था कर सकूँ। समझौता अतिम करने से पहले मैं स्थानीय बाजार में उपलब्ध वस्त्रों और उनकी कीमतों की तुलना करूँगा।
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विदेशी व्यापारी से बातचीत करने के लिए मैं दुबाशियों (दुभाषियों और अनुवादकों) की सहायता ले सकता हूँ, जो विदेशी और भारतीय भाषाएँ जानते हों। बातचीत, भुगतान और अन्य वित्तीय व्यवस्थाओं के लिए मैं दलालों, बैंकरों और मुद्रा बदलने वाले लोगों की सहायता भी ले सकता हूँ।
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मुझे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भाषाओं में अंतर के कारण समझौते की शर्तों को लेकर गलतफहमियाँ हो सकती हैं। विदेशी व्यापारी वस्त्रों की ऐसी विशेष गुणवत्ता, डिजाइन, मात्रा या कीमत की माँग कर सकता है, जो आसानी से उपलब्ध न हो। माँग और आपूर्ति के कारण कीमतें भी बदल सकती हैं। मुझे वस्तुओं के परिवहन, भंडारण और सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था भी करनी होगी। इसलिए सफल व्यापार के लिए अच्छा संचार, विश्वसनीय स्थानीय संपर्क, उचित वित्तीय व्यवस्थाएँ और वस्तुओं की गुणवत्ता की सावधानीपूर्वक जाँच आवश्यक होगी।
थे, जिससे शत्रु सेनाओं के लिए उन पर अधिकार करना कठिन हो जाता था। पूर्ण संसाधनों को शत्रुओं के हमलों से बचाते थे। अनेक किले पहाडियों, चट्टानी क्षेत्रों और अन्य कठिन भूभागों पर बन
स्थिति में वैकल्पिक राजधानियों के रूप में काम कर सकते थे। कुछ किले अग्रिम सैन्य चौकियों के रूप में कार्य करते थे. जबकि अन्य किसी महत्त्वपर्ण केंद्र पर शत्रु का अधिकार किलों को लंबी घेराबंदी का सामना करने के लिए भी बनाया जाता था। इनमें अक्सर मजबूत रक्षात्मक दीवारें जल मोत भंडारण क्षेत्र और शस्त्रागार होते थे। इनसे किले के अंदर रहने वाले लोग और सैनिक लंबे समय तक सुरक्षित रहत
किले प्रशासन और न्यायिक अधिकार के केंद्रों के रूप में भी कार्य करते थे। उदाहरण के लिए, मराठों ने रायगढ़ और जैसे किलों का उपयोग एक बड़े रक्षात्मक नेटवर्क के हिस्से और छापामार युद्ध के रणनीतिक केंद्रों के रूप में किया। इसलिए शासक समझते थे कि किले केवल सुरक्षा प्रदान करने वाले भवन नहीं थे बल्कि वे रक्षा, प्रशासन, संसाधनों के और रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों पर नियंत्रण रखने के प्रमुख केंद्र भी थे।
अध्ययन की जा रही अवधि के दौरान मंदिर निर्माण की वास्तुकला में कौन-से परिवर्तन हुए? इन परिवर्तनों ने अनिश्चितता या आक्रमण के समय दृढ़ता को किस प्रकार दर्शाया?
उत्तर: 16वीं शताब्दी से कुछ क्षेत्रों में मंदिरों की वास्तुकला में परिवर्तन हुए, क्योंकि राजनीतिक अनिश्चितता के समय समुदाये पवित्र स्थलों की रक्षा करनी पडती थी। मंदिरों को कभी-कभी कम दिखाई देने वाले स्थानों जैसे संकरी गलियों में जाता था और उनके प्रवेश द्वार हमेशा मुख्य सड़कों की ओर नहीं खुलते थे।
अनेक मंदिरों में सामान्य भव्य स्वरूप से भी बचा जाने लगा। कुछ मंदिरों को साधारण घरों या हवेलियों जैसा बनाया बाहरी दीवारों पर विस्तृत सजावट कम हो गई और कभी-कभी ऊँचे शिखरों से भी बचा गया। ऐसी संरचनाएँ कम दिया देती थीं और इसलिए अनचाहा ध्यान आकर्षित करने की संभावना भी कम होती थी।
ये वास्तुकला संबंधी परिवर्तन दृढ़ता का एक रूप थे, क्योंकि समुदायों ने बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसर की की बनावट और स्थान में परिवर्तन किए। अपनी धार्मिक प्रथाओं को छोड़ने के बजाय उन्होंने पवित्र स्थलों की रक्षा का और अपनी धार्मिक तथा सांस्कृतिक परंपराओं को जारी रखने के नए तरीके खोजे।
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7. किसी राज्य के पास सीमित सैन्य संसाधन हैं, लेकिन उसकी कृषि भूमि उपजाऊ है, उसे स्थानीय लोगों का मजबूत समर्थ प्राप्त है और उसे अपने भूभाग का विस्तृत ज्ञान है। ऐसे दो तरीके समझाइए, जिनसे ये संसाधन किसी खतरे का सामना का समय राज्य को दृढ़ बने रहने में सहायता कर सकते हैं।
उत्तरः पहला, उपजाऊ कृषि भूमि लोगों और सेना के लिए भोजन तथा आर्थिक संसाधनों की नियमित आपूर्ति कर सकती है। राज्य लंबे संघर्ष के दौरान भी अपना कामकाज जारी रख सकता है।
दूसरा, मजबूत स्थानीय समर्थन और भूभाग का विस्तृत ज्ञान राज्य को छापामार युद्ध, अचानक हमले और कठिन का से सुरक्षित आवाजाही जैसी रणनीतियाँ अपनाने में सहायता कर सकता है। स्थानीय लोग जानकारी और अन्य प्रकार। सहायता भी प्रदान कर सकते हैं। इस प्रकार, सीमित सैन्य संसाधनों वाला राज्य भी अधिक शक्तिशाली शत्रु का प्रति जारी रख सकता है।
8. निम्नलिखित कथन पर विचार कीजिए:
"जब लोग किसी परंपरा को अपने साथ ले जा सकते हैं, तो वह परंपरा अधिक दृढ़ बन जाती है।"
क्या आप सहमत हैं? भक्ति परंपरा के उदाहरणों का उपयोग करके समझाइए।
उत्तर: हाँ. मैं सहमत हैं। कोई परंपरा तब अधिक दृढ़ बन जाती है, जब लोग किसी विशेष भवन या भौतिक स्थान पर पूरी तरह रहने के बजाय जहाँ भी जाएँ, उसका पालन कर सकें और उसे सुरक्षित रख सकें। भक्ति परंपरा इसका एक अच्छा उदाहरण है। भक्ति संतों ने स्थानीय भाषाओं, भक्ति गीतों नाम कीर्तन संकीर्तन और स
के माध्यम से अपनी शिक्षाओं का प्रसार किया। इन प्रथाओं का पालन विभिन्न स्थानों पर किया जा सकता था और लिए हमेशा बडे धार्मिक भवनों की आवश्यकता नहीं होती थी। जब मंदिर या अन्य पूजा स्थल उपलब्ध नहीं होते थे चैतन्य महाप्रभु, गुरु नानक, शंकरदेव और तुलसीदास जैसे भक्ति संतों ने भी ऐसी भाषाओं और भक्ति के रूपों का उ कर दिए जाते थे, तब भी लोग गीतों प्रार्थनाओं और सामुदायिक सभाओं के माध्यम से अपनी भक्ति जारी रख सकते थो किया, जो सामान्य लोगों तक पहुँच सकते थे। इस प्रकार, भक्ति परंपरा अधिक दृढ बनी क्योंकि इसकी शिक्षाओं को ि क्षेत्रों और परिस्थितियों में समुदायों द्वारा याद रखा जा सकता था. साझा किया जा सकता था और उनका पालन किया जा स था।
अतीत की आवाजें
निम्नलिखित में से किन्हीं दो व्यक्तियों को चुनिए और प्रथम पुरुष में एक संक्षिप्त विवरण लिखिए। इसमें समझाइए कि उस व्यक्ति के दृष्टिकोण से दृढ़ता का क्या अर्थ है।
एक भक्ति संत
एक राजपूत सैनिक
एक अहोम सेनापति
एक मराठा प्रशासक
एक व्यापारी
एक जाट नेता
उदाहरण 1 एक भक्ति संत
उत्तरः में सामान्य लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा में भजनों और गीतों के माध्यम से अपनी भक्ति व्यक्त करता हूँ। मेरे लिए दृढ़ता का अर्थ कठिन समय में भी अपने धर्म, आध्यात्मिक विश्वासों और परंपराओं को जीवित रखना है। भजनों, कीर्तन और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से मैं केवल भौतिक पूजा स्थलों पर निर्भर रहे बिना लोगों के साथ भक्ति साझा कर सकता हूँ। इस प्रकार, हमारे विश्वास और परंपराएँ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जारी रह सकती हैं।
उदाहरण 2 : एक अहोम सेनापति
उत्तरः मेरे लिए दृढ़ता का अर्थ अपनी शक्तियों, संसाधनों और असम की भौगोलिक परिस्थितियों के ज्ञान का उपयोग करके अपनी भूमि की रक्षा करना है। हम अपने वनों, नदियों और मानसून चक्रों को आक्रमणकारी सेनाओं से बेहतर समझते हैं। छापामार युद्ध की रणनीतियों, संगठित सेनाओं और नदी में युद्ध करने के लिए तेज बचारी नावों का उपयोग करके हम अधिक शक्तिशाली शत्रु का भी प्रतिरोध जारी रख सकते हैं। स्थानीय भूभाग का हमारा ज्ञान और अपनी भूमि की रक्षा करने का दृढ़ संकल्प हमारी सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं।
10. एक किले की रूपरेखा तैयार कीजिए।
आप एक शासक को सलाह देने वाले सैन्य वास्तुकार हैं।
एक किले की सरल और नामांकित योजना बनाइए, जिसमें निम्नलिखित शामिल होंः
आवासीय परिसर
रक्षात्मक दीवारें
जल स्रोत
खाद्य भंडारण
बच निकलने का मार्ग
प्रहरी मीनार
प्रशासनिक क्षेत्र
अब कुछ वाक्य लिखकर समझाइए कि आपकी योजना राज्य को लंबी घेराबंदी का सामना करने में किस प्रकार सहायता करेगी।
उत्तरः मेरे किले के पूरे परिसर के चारों ओर मजबूत रक्षात्मक दीवारें होंगी, जिससे शत्रु सेनाओं के लिए अंदर प्रवेश करना कठिन होगा। महत्त्वपूर्ण स्थानों पर प्रहरी मीनारें बनाई जाएँगी, ताकि सैनिक पास आती सेनाओं को देख सकें और किले को पहले से चेतावनी दे सकें। एक सुरक्षित जल स्रोत और खाद्य भंडारण क्षेत्र आवश्यक आपूर्ति प्रदान करेंगे तथा अंदर रहने वाले लोगों को लंबी घेराबंदी के दौरान जीवित रहने में सहायता करेंगे।
आवासीय परिसर और प्रशासनिक क्षेत्र रक्षात्मक दीवारों के अंदर सुरक्षित स्थानों पर होंगे, ताकि हमले के दौरान भी दैनिक जीवन और प्रशासन जारी रह सके। एक सुरक्षित बच निकलने का मार्ग गंभीर आपातकाल की स्थिति में किले से बाहर जाने का रास्ता प्रदान करेगा। ये सभी विशेषताएँ मिलकर किले को सरक्षित, सुव्यवस्थित और काफी हद तक आत्मनिर्भर बनाएँगी, जिससे राज्य को लंबी घेराबंदी का सामना करने में सहायता मिलेगी।
अतिरिक्त प्रश्न और उत्तर
1. इस अध्याय के संदर्भ में दृढ़ता का क्या अर्थ है?
उत्तरः दृढ़ता का अर्थ व्यक्तियों, समुदायों और समाजों की वह क्षमता है. जिसके द्वारा वे कठिनाइयों का सामना करते हैं, वर ने आक्रमणों और राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद अपनी राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक परंपराओं की रक्षा का परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालते हैं और अपनी जीवनशैली जारी रखते हैं। 1000-1700 ई. के दौरान भारतीय मु
दृढ़ता दिखाई। भौगोलिक परिस्थितियों ने भारतीय राज्यों को आक्रमणकारी सेनाओं का प्रतिरोध करने में किस प्रकार सहायता की?
2. उत्तरः स्थानीय भूगोल के ज्ञान ने अनेक राज्यों को आक्रमणकारी सेनाओं पर बढ़त प्रदान की। अहोमों ने असम के वनों नदिय मानसून की परिस्थितियों का उपयोग किया, जबकि मराठों ने दक्कन की पहाडियों, घाटियों और किलों का उपयोग किया महाराणा प्रताप ने भी छापामार युद्ध के लिए अरावली के कठिन भूभाग का उपयोग किया।
3. अहोमों के लिए सरायघाट का युद्ध क्यों महत्त्वपूर्ण था?
उत्तरः 1671 में सरायघाट के युद्ध में अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन ने मुगल नौसैनिक बेड़े को पराजित किया। इस विजय ने अहमिं को अपने क्षेत्र की रक्षा करने में सहायता की और ब्रह्मपुत्र नदी को एक प्रभावी क्षेत्रीय सीमा के रूप में सुरक्षित किया।
4. पाइक व्यवस्था ने अहोम राज्य को किस प्रकार मजबूत बनाया?
उत्तरः पाइक व्यवस्था ने अहोम राज्य को एक संगठित सैन्य और प्रशासनिक प्रणाली प्रदान की। रणनीतिक गठबंधनों, छापामार पुढ की रणनीतियों, स्थानीय भूगोल के ज्ञान और मजबूत नौसेना के साथ मिलकर इस व्यवस्था ने अहोमों को आक्रमणकारी संतों का सफलतापूर्वक प्रतिरोध करने में सहायता की।
5. विजयनगर साम्राज्य की स्थिति उसकी रक्षा के लिए उपयोगी क्यों थी?
उत्तरः विजयनगर वर्तमान कर्नाटक में हम्पी के निकट स्थित था, जहाँ नदी और ऊबड़-खाबड़ चट्टानी भूभाग ने प्राकृतिक सुरक्षा ग की। इस भौगोलिक स्थिति ने शासकों को सैन्य अभियानों के लिए एक सुरक्षित आधार दिया और अपने राज्य की रक्षा में सहायता की।
6. छत्रपति शिवाजी ने मराठा शक्ति को मजबूत बनाने के लिए किलों का उपयोग किस प्रकार किया?
उत्तरः छत्रपति शिवाजी ने रायगढ़ और सिंहगढ़ जैसे किलों का एक मजबूत जाल विकसित किया। ये किले रक्षा, प्रशासन और प युद्ध के केंद्रों के रूप में कार्य करते थे। कुछ किले अग्रिम सैन्य चौकियों के रूप में काम करते थे जबकि अन्य बैंकॉक राजधानियों के रूप में उपयोग किए जा सकते थे।
मराठों के लिए स्वराज्य के विचार का क्या महत्त्व था?
स्वराज्य का अर्थ स्वयं का शासन था। मराठों के लिए यह बाहरी नियंत्रण से मुक्त एक स्वतंत्र और स्वशासित क्षेत्र के विचार का प्रतिनिधित्व करता था। छत्रपति शिवाजी ने मराठा शक्ति की स्थापना करते समय इस विचार का दृढ़ता से समर्थन किया।
सिक्ख परंपरा में मीरी पीरी का क्या महत्त्व था?
पोरी सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों मामलों में गुरु के अधिकार का प्रतिनिधित्व करती थी। मीरी लौकिक सत्ता का प्रतिनिधित्व करती थी. जबकि पीरी आध्यात्मिक सत्ता का प्रतिनिधित्व करती थी। अकाल तख्त लौकिक सत्ता का प्रतिनिधित्व करता था. जबकि हरमंदिर साहिब आध्यात्मिक सत्ता का प्रतिनिधित्व करता था।
गुरु गोबिंद सिंह ने बदलती सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के जवाब में 1699 में खालसा की स्थापना की। यह एक विशिष्ट मैन्य आचार संहिता वाले सिक्ख संगठन के रूप में विकसित हुआ और इसने आध्यात्मिक पहचान तथा राजनीतिक प्रतिरोध के बीस संबंध को मजबूत बनाया।
आलसा की स्थापना क्यों की गई थी?
भक्ति परंपरा ने सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखने में किस प्रकार सहायता की?
भक्ति परंपरा में स्थानीय भाषाओं, भक्ति गीतों नाम कीर्तन, संकीर्तन और सत्संग का उपयोग किया गया। इन प्रथाओं ने लोगों को तब भी अपनी भक्ति जारी रखने की अनुमति दी. जब भौतिक पूजा स्थल उपलब्ध नहीं थे या नष्ट कर दिए गए थे। इससे बास्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखने तथा उनका प्रसार करने में सहायता मिली।
महिलाओं ने भक्ति परंपरा में किस प्रकार योगदान दिया?
विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमियों की महिलाएँ महत्त्वपूर्ण भक्ति संत बनीं। अक्का महादेवी, लल देद, बहिणाबाई और अनुकुरी मोल्ला जैसी संतों ने भक्ति रचनाओं के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक भावनाओं को व्यक्त किया और धार्मिक तथा सांस्कृतिक परंपराओं के प्रसार में सहायता की।
बदलती
पूजा स्थलों के अतिरिक्त मंदिरों का क्या महत्त्व था?
नमुदायों
करके
इमाः मंदिर आर्थिक, शैक्षिक, कलात्मक और सामाजिक जीवन के भी महत्त्वपूर्ण केंद्र थे। वे रोजगार प्रदान करते थे, भूमि का प्रबंधन करते थे, सिंचाई में सहायता करते थे, ऋण देते थे तथा कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करते थे। कुछ मंदिर प्रशासनिक और न्यायिक कार्य भी करते थे।
यों और
किया।
13. राजनीतिक अनिश्चितता के समय मंदिरों की वास्तुकला में किस प्रकार परिवर्तन हुए?
सरः 16वीं शताब्दी से कुछ मंदिर कम दिखाई देने वाले स्थानों और संकरी गलियों में बनाए जाने लगे। कई मंदिर साधारण घरों जैसे दिखाई देते थे और उनमें ऊँचे शिखरों तथा बाहरी दीवारों पर अधिक सजावट से बचा जाता था। इन परिवर्तनों ने मंदिरों के नष्ट होने के खतरे को कम किया और समुदायों को अपनी धार्मिक परंपराएँ जारी रखने में सहायता की।
५ हुंडी क्या थी और यह क्यों उपयोगी थी?
अहोमों
तरः हुडी एक वित्तीय साधन थी, जो आधुनिक बैंक चेक या विनिमय पत्र के समान थी। इसके माध्यम से व्यापारी बड़ी मात्रा में नकद धन साथ रखे बिना बड़े लेन-देन कर सकते थे और लंबी दूरी तक धन भेज सकते थे। इससे व्यापार अधिक सुरक्षित और आसान हो गया।
बार युद्ध
सेनाओं
15. हिंद महासागर के व्यापार में भारत महत्त्वपर्ण क्यों बन गया?
तारः भारत में मजबूत व्यापारी समुदाय, महत्त्वपूर्ण बंदरगाह, मूल्यवान उत्पाद और विकसित व्यापारिक नेटवर्क थे। भारत की भौगोलिक स्थिति पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र और चीन के बीच व्यापारिक मार्गों को जोड़ती थी। इससे भारतीय उपमहाद्वीप हिंद महासागर के व्यापार का एक महत्त्वपर्ण केंद्र बन गया।
बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर
वा प्रदान
क्षा करने
वर्ष 1671 में सरायघाट के युद्ध में मुगल नौसैनिक बेडे को किसने पराजित किया?
(क) महाराणा प्रताप
(ख) लाचित बोरफुकन
(ग) राणा साँगा
(घ) गुरु हरगोबिंद
1. अहोमों द्वारा नदी में युद्ध करने के लिए विशेष रूप से किन नावों का उपयोग किया जाता था?
(क) धो
(ख) जंक
(ग) बचारी
(घ) गैलियन
छापामार
कल्पिक
३. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किस वर्ष हई थी?
(क) 1206
(ख) 1336
(ग) 1526
(घ) 1565
4. विजयनगर राज्य की स्थापना किसने की थी?
(क) हरिहर और बुक्का
(ग) अकबर और जहाँगीर
(ख) राणा साँगा और राणा कुंभा
(घ) शिवाजी और संभाजी
5. मराठों के स्वयं के शासन से कौन-सा विचार निकटता से जुड़ा हुआ था?
(क) सुलह-ए-कुल
(ख) स्वराज्य
(ग) इक्ता
(घ) मनसब
6. निम्नलिखित में से कौन-सा एक महत्त्वपूर्ण मराठा किला था?
(क) रायगढ़
(ख) गढ़गाँव
(ग) कन्ननूर
(घ) श्रीरंगम
7. अकाल तख्त की स्थापना किसने की थी?
(क) गुरु नानक
(ख) गुरु अर्जन देव
(ग) गुरु हरगोबिंद
(घ) गुरु गोबिंद सिंह
8. वर्ष 1699 में खालसा की स्थापना किसने की थी?
(क) गुरु तेग बहादुर
(ख) गुरु गोबिंद सिंह
(ग) गुरु अर्जन देव
(घ) गुरु नानक
9. वर्ष 1669 के जाट विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था?
(क) गोकुल जाट
(ख) लाचित बोरफुकन
(ग) हरिहर
(घ) कुमार कम्पण
10. ईश्वर के नाम के उच्चारण को किस शब्द से जाना जाता है?
(क) मनसब
(ख) नाम कीर्तन
(ग) इक्ता
(क) हुंडी
11. अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना किसने की थी?
(क) कबीर
(ख) तुलसीदास
(ग) शंकरदेव
(घ) एकनाथ
12. किस नीति का अर्थ 'सभी के साथ शांति' या 'सार्वभौमिक
सहिष्णुता' था?
(घ) पाइक
(क) स्वराज्य
(ख) सुलह-ए-कुल
(क) केवल यूरोपीय व्यापारियों की
(ग) मीरी-पीरी
13. हुंडी का मुख्य रूप से किस कार्य के लिए उपयोग किया जाता था?
(क) किलों का निर्माण करने के लिए
(ख) सैनिकों की भर्ती करने के लिए
(ग) वित्तीय लेन-देन करने और धन भेजने के लिए
(घ) मंदिरों का निर्माण करने के लिए
14. हुंडी व्यवस्था में मुद्रा बदलने वाले लोगों को क्या कहा जाता था?
(क) सर्राफ
(ख) पाइक
(ग) मिसल
(घ) बंजारे
15. 15वीं शताब्दी से पहले हिंद महासागर के व्यापार में किन व्यापारियों की मजबूत उपस्थिति थी?
(ग) केवल मुगल व्यापारियों की
(ख) अरब, चीनी और भारतीय व्यापारियों की
(घ) केवल पुर्तगाली व्यापारियों की
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